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परिजनों ने केजीएमयू में भर्ती न किए जाने का लगाया आरोप
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लखनऊ: बलरामपुर अस्पताल में उपचार के दौरान दो महिलाओं ने दमतोड़ दिया, इसमें एक की जापनी इंसेफ्लाइटिस और दूसरा संदिग्ध डेंगू से मौत का कारण बताया गया। जापानी इंसेफ्लाइटिस (जेई) से पीड़ित एक महिला के तीमारदारों ने आरोप लगाया कि किंग जार्ज चिकित्सा विविद्यालय (केजीएमयू) में मरीज को भर्ती नहीं किया गया। ऐसी स्थिति में बलरामपुर अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। जेई से हुई मौत श्रावस्ती निवासी पूनम (35) को 10 दिन से बुखार आ रहा था। परिवारीजनों ने बताया कि पहले श्रावस्ती में कुछ दिन इलाज कराते रहे।

लाभ न होने पर डाक्टरों ने केजीएमयू रेफर किया था, जहां डाक्टरों ने महिला को भर्ती करने से मना कर दिया। इस पर तीमारदारों ने पूनम को बुधवार को बलरामपुर की इमरजेंसी में भर्ती कराया। डॉक्टरों ने बताया कि पूनम के दिमाग की एमआरआई कराने पर जेई की पुष्टि हुई थी। शनिवार की दोपहर करीब एक बजे इलाज दौरान उसकी मौत हो गई। एक और मरीज की उपचार के दौरान मौत हुई। हुसैनाबाद निवासी मो. नाजिम की बेटी साजिया (18) को करीब सात दिन से बुखार आ रहा था।

तीमारदारों ने शुक्रवार रात अचानक हालत बिगड़ने पर निजी अस्पताल गए, जहां हालत गंभीर बताकर उसके दूसरे अस्पताल में दिखाने की सलाह दी गयी। परिजन ने मरीज को बलरामपुर अस्पताल में भर्ती कराया, जहां इमरजेंसी में साजिया की शनिवार दोपहर डेढ़ बजे मौत हो गई। पिता ने बताया कि खून की जांच कराई गई थी, लेकिन उसकी रिपोर्ट अभी तक नहीं मिली थी। साजिया को बुखार के साथ ही शरीर पर चकत्ते पड़ गए थे। डाक्टरों ने डेंगू होने की आशंका जतायी थी।

बलरामपुर अस्पताल की इमरजेंसी में शनिवार को एक युवक जुनैद खान अपने पांच साल के बच्चे का उपचार कराने आया। डाक्टर के सहयोगी ने तीमारदार पिता से की अभद्रता की। इसकी शिकायत करने के लिए अस्पताल के निदेशक डा. राजीव लोचन के पास पहुंच गया लेकिन किसी शिकायत का सामधान नहीं हुआ। ऐसी स्थिति में उसने बच्चे का इलाज कराए बिना वापस घर लौट गया। वह अपने को पत्रकार बता रहे थे। अस्पताल प्रशासन के अनुसार शिकायत करने कथित पत्रकार ने कोई लिखित शिकायत नहीं है। 

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